हिन्दी समेत सभी भारतीय भाषाओं के विकास, प्रचार-प्रसार और राष्ट्रीय समन्वय के लिए समर्पित — एक अग्रणी सांस्कृतिक संस्था।
त्रैमासिक पत्रिका · जुलाई–सितंबर 2025
भारतीय भाषाओं के उत्थान हेतु साहित्य, संस्कृति और विचार का संगम — हर अंक में नई दृष्टि।
PDF डाउनलोड करेंहिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष का देशवासियों को संदेश
देश की विभिन्न भाषाओँ को एक धागे में पिरोकर भारत को विश्व में सर्वोच्च शिखर पर पहुंचाना ही हमारा लक्ष्य है।
हिंदी समेत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल लगभग सभी भारतीय भाषाओं के उत्थान और प्रचार-प्रसार के लिए कई सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर कार्य कर रही हैं। गंभीरता से अध्ययन करने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि इन संस्थाओं में समन्वय का अभाव है।
आज एक ऐसे मंच की जरूरत है जहां देश की सभी भारतीय भाषाएं एक दूसरे का हाथ थामे खड़ी दिखाई दें। इसी ध्येय को ध्यान में रखते हुए 'हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी' का गठन हुआ है।
हिंदी की मजबूती के लिए जमीनी स्तर पर ठोस कार्य करने की जरूरत है। भाषाई कट्टरता से राजनीति तो की जा सकती है लेकिन उसकी स्वीकार्यता नहीं बढ़ाई जा सकती। हिन्दी आज भारत में सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा है।
जिस दिन हम हिंदी को संपर्क भाषा बनाने में सफल हो गए, उस दिन इसे देश की राष्ट्रभाषा बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।
क्षेत्रीय भाषाओँ के साथ सर्वमान्य बोलियों का संवर्धन और विकास किया जाए — उनके शब्दों का हिन्दी में प्रयोग करने के लिए तंत्र बनाए जाएं और तकनीकी शब्दावली विकसित की जाए। इससे भारतीय भाषाओं में आपसी सामंजस्य और सौहार्द बढ़ेगा।
हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और समन्वय के लिए निरंतर कार्यरत है।
हिन्दी समेत सभी भारतीय भाषाओं की संपर्क भाषा के रूप में स्वीकार्यता हेतु चेतनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन।
सृजनात्मक साहित्य का प्रोत्साहन, प्रकाशन एवं विभिन्न भाषाओं में अनुवाद की व्यवस्था।
भारतीय भाषाओं के शिक्षकों और मेधावी छात्रों को सम्मानित करना।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संगठन निर्माण व भाषा समन्वय।
त्रैमासिक पत्रिका 'हिन्दुस्तानी भाषा भारती' का नियमित प्रकाशन।
© 2024 Created with Royal Elementor Addons